वैदिक गणित – गणना नहीं, संख्याओं का नृत्य ( Vedic Ganit Is A Dance of Numbers ) है
वैदिक गणित केवल गणनाओं की विधियाँ नहीं सिखाता, बल्कि यह संख्याओं के साथ एक जीवंत, सहज और रचनात्मक संवाद स्थापित करने की कला है। ‘गणना नहीं, संख्याओं का नृत्य है’—यह वाक्य इस प्राचीन भारतीय गणितीय प्रणाली की आत्मा को दर्शाता है। वैदिक गणित में सूत्रों के माध्यम से गणना के जटिल प्रश्नों को सरलता से हल किया जा सकता है, मानो संख्याएँ स्वयं नृत्य करती हुई समाधान तक पहुँचती हैं।
वैदिक गणित के सूत्र मुख्यतः पूरी पीठ के 143वें जगद्गुरु स्वामी भारतीकृष्णतीर्थ जी महाराज के द्वारा पुनः प्रस्तुत किए गए थे, जिन्होंने वेदों विशेष तौर पर अथर्ववेद के ऋचाओं में छिपे गणितीय रहस्यों को उजागर किया। उन्होंने 16 मूल सूत्र और 13 उपसूत्रों के माध्यम से एक ऐसी प्रणाली विकसित की जो गणितीय गणना को मानसिक गणना के रुप में परिभाषित करने के कारण इसे मानस-गणित के नाम से भी अलंकृत किया, इसके साथ-साथ बीजगणित, ज्यामिति, त्रिकोणमिति आदि के जटिल विषयों को सरल और स्वभाविक रूप में प्रस्तुत करती है।
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एक अर्थपूर्ण अभिव्यक्ति (Vedic Ganit Is A Dance of Numbers)
इस प्रणाली का सबसे बड़ा आकर्षण इसके सूत्रों की सहजता और लयात्मक प्रवाह है। जैसे नृत्य में प्रत्येक मुद्रा से एक अर्थपूर्ण अभिव्यक्ति होती है, वैसे ही वैदिक गणित में प्रत्येक सूत्र संख्याओं की गहराई में उतरने का माध्यम बनता है। उदाहरण के लिए, “एकाधिकेन पूर्वेण” सूत्र का उपयोग करके हम किसी भी संख्या का तेज़ी से गणना करते हैं, वर्ग निकाल सकते हैं, गुणन प्रक्रिया में सहायक होता है और भी अंकगणितीय एवं बीजगणितीय संक्रियाओं में सहायक होता है।
इस प्रकार यह सूत्र केवल गणना का कार्य नहीं है, बल्कि संख्याओं के साथ एक रचनात्मक सहयोग करने में सहायक होता है। यहाँ सूत्रों और संख्याओं के लयात्मक संयोग से गणना के साथ-साथ जीवन उद्देश्य धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष के लिए भी उपयोगी है। जिसका मूल उद्देश्य “स्वांतः सुखाय” मंत्र को पुनर्स्थापित करता है ।
वैदिक गणित से व्यक्ति का सर्वांगीण विकास
वैदिक गणित का अभ्यास मस्तिष्क के दोनों बायां एवं दायां भागों—तर्कपूर्ण और रचनात्मक—को सक्रिय करता है। यह न केवल बच्चों को तेज गणना सिखाता है, बल्कि उनमें आत्मविश्वास, ध्यान और तार्किक सोच का भी विकास करता है। आज के तकनीकी युग में जब कैलकुलेटर और कंप्यूटर हमारे दैनिक गणनाओं के उपकरण बन गए हैं, वैदिक गणित हमें यह सिखाता है कि कैसे मनुष्य की बुद्धि इन उपकरणों से अधिक शक्तिशाली और सक्षम हो सकती है।सीधे शब्दों में यदि कहा जाए तो वैदिक गणित किसी व्यक्ति का सर्वांगीण विकास कर व्यक्तित्व में परिवर्तित करने की क्षमता रखता है।
वर्तमान शिक्षा जगत में वैदिक गणित को धीरे-धीरे पुनः स्थान मिलने लगा है। अनेक विद्यालय, महाविद्यालय, विश्वविद्यालय. के साथ-साथ निजी कोचिंग संस्थान इसे वैकल्पिक विषय के रूप में अपना रहे हैं। इसकी सरल और सहज तकनीकों का उपयोग प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में भी बहुत उपयोगी सिद्ध हो रहा है। इसके अलावा, यह पद्धति विद्यार्थियों में गणित के प्रति रुचि और प्रेम उत्पन्न करती है, जो पारंपरिक गणना-पद्धति से संभव नहीं हो पाता। वैदिक गणित के साथ छात्र अपने आप को पारंपरिक गणित के भय से मुक्त अनुभव करता है ।
संक्षेप में, वैदिक गणित केवल एक विषय मात्र नहीं, बल्कि एक अद्भुत अनुभव है। यह हमें जटिल संख्याओं को बोझ नहीं, बल्कि आनंददायक नृत्य के रूप में देखने की दृष्टि देता है। जब हम संख्याओं के साथ 16 सूत्रों एवं 13 उपसूत्रों के साथ लय में आते हैं, तब गणना एक कला बन जाती है—वैसी ही जैसे कोई कुशल नर्तक अपने हर हाव-भाव और गति से एक कथा की अभिव्यक्ति करता है। वैदिक गणित वास्तव में संख्याओं का नृत्य है—गहन, लयात्मक और सजीव। जो जिज्ञासु को गणितीय अनुभव के साथ-साथ आत्मकल्याण की ओर प्रेरित करता है।